DBMS क्या है? DBMS के प्रकार एवं इसके फायदे क्या क्या है?

DBMS क्या है? DBMS के प्रकार एवं इसके फायदे क्या क्या है?

 DBMS क्या है?
- आज के डिजिटल युग में डाटा का बड़ा ही महत्व है। हम अक्सर इसके बारे में सुनते हैं। किसी भी डाटा को मैनेज करने के लिए DBMS (Database Management System) का इस्तेमाल किया जाता है। इसका इस्तेमाल बड़ी-बड़ी कंपनियां एवं संस्थाएँ द्वारा अपने यूजर्स एवं कस्टमर्स के इंपोर्टेंट डाटा को मैनेज करने के लिए करती हैं। लेकिन बहुत सारे लोगों को Database Managment System के बारे में जानकारी नहीं होती है। इसीलिए इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि DBMS क्या है? DBMS के प्रकार एवं इसके फायदे क्या क्या है?


DBMS एक ऐसा सॉफ्टवेयर होता है जिसकी मदद से डाटा को मैनेज किया जाता है। किसी भी डाटा को मैनेज करने के लिए यह सबसे आसान और सुविधाजनक तरीका है। यदि आप कोई कंपनी या कोई संस्था चला रहे हैं और यूजर्स और कस्टमर्स का डाटा मैनेज करना चाहते हैं तो आपको इसके बारे में जानकारी होना आवश्यक है। यदि आपको इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं है तो यहां पर हम आपको DBMS के बारे में पूरी जानकारी देंगे।


DBMS क्या है?

DBMS एक ऐसा सॉफ्टवेयर होता है जिसे डेटाबेस में यूजर्स के डाटा को स्टोर करने उसे व्यवस्थित करने और उसके साथ छेड़छाड़ करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। यदि आपको प्रोग्रामिंग के बारे में जानकारी है तो जैसे डेटाबेस के बारे में जरूर जानते होंगे क्योंकि इनका इस्तेमाल कई ऐप्स में किया जाता है।


DBMS सॉफ्टवेयर एक ऐसा इंटरफ़ेस प्रदान करता है जिसकी मदद से आप किसी भी डाटा को बड़े ही आसानी से स्टोर अपडेट और नए टेबल डाटा बेस बना सकते हैं जिसकी मदद से आप के कई सारे कार्य बड़े ही आसानी से पूरे हो सकते हैं। इस सॉफ्टवेयर में कई सारे अलग-अलग प्रोग्राम होते हैं जिसकी मदद से आप किसी भी डेटाबेस के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं और उन्हें अपने हिसाब से मैनेज कर सकते हैं।


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DBMS सॉफ्टवेयर की मदद से आप किसी भी महत्वपूर्ण डांटा को बड़े ही आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इतना ही नहीं इस सॉफ्टवेयर की मदद से आप खुद से कोई भी डाटाबेस बना सकते हैं और उन्हें मैनेज कर सकते हैं। जब यहां पर किसी भी एप्लीकेशन द्वारा डाटा के लिए रिक्वेस्ट किया जाता है तो यह सॉफ्टवेयर उस रिक्वेस्ट को एक्सेप्ट करके डाटा दिखाने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम को निर्देश देता है। इसीलिए इसका इस्तेमाल बड़ी-बड़ी कंपनियां किसी भी सॉफ्टवेयर के डाटा को स्टोर करने के लिए और उन्हें मैनेज करने के लिए करती हैं।


DBMS के प्रकार:

कार्यप्रणाली के अनुसार DBMS को मुख्यतः चार प्रकार में बांटा गया है। इसके बारे में हम आपको नीचे बताने जा रहे हैं।


Hierarchical Model:

Hierarchical Model DBMS का स्ट्रक्चर एक पेड़ की तरह होता है। जिस प्रकार किसी भी पेड़ में कई सारी शाखाएं होती हैं, ठीक उसी प्रकार इस DBMS में जो रिकॉर्ड उपलब्ध होता है वह Top या Bottom से जुड़ा रखता है। इस DBMS में कोई भी डाटा Parent और Child की तरह स्टोर होता है। 


जैसे किसी Parent के कई Childs हो सकते हैं, ठीक उसी तरह किसी भी विभाग के अंतर्गत कई सारे कोर्स चलाए जाते हैं। यहां पर आप एक Parent Database बनाकर उसके अंतर्गत कई सारे अलग-अलग Child Database बना सकते हैं।


Network Model:

Network Model DBMS; Hierarchical Model से बिल्कुल उल्टा काम करता है क्योंकि यहां पर Represent किए गए Object में प्रत्येक Child के अलग-अलग Parents हो सकते हैं। इस मॉडल को Flexible Approach के अनुसार डिजाइन किया गया है। इसके अंतर्गत Entities Graphs को Organize किया जाता है जिसको अलग-अलग Paths द्वारा बड़े ही आसानी से एक्सेस किया जा सकता है।


Relation Model:

Relation Model DBMS को शॉर्ट फॉर्म में RDBMS कहा जाता है। इस प्रकार के DBMS में सभी डाटा Structured Format में स्टोर होते हैं यानी इसमें सभी डाटा को सेव करने के लिए Row और Column बनाए गए होते हैं। इन सभी Row और Column के बीच रिलेशन होता है और प्रत्येक की वैल्यू एक दूसरे से जुड़ी हुई होती है। इसके चलते इस डेटाबेस के अंतर्गत किसी भी वैल्यू को लोकेट और एक्सेस करना आसान रहता है।


Object Oriented Model

इस प्रकार के DBMS में सभी डाटा Object Form में स्टोर रहते हैं और इस Structure को Class कहा जाता है जो कि डाटा को प्रदर्शित करते हैं। Object Oriented Model वाला DBMS किसी भी Object को कलेक्शन की तरह परिभाषित करता है। दरअसल यहां पर अलग-अलग डाटा के बीच रिलेशन सिंगल स्ट्रक्चर में स्टोर रहता है और इसी को Object के नाम से जाना जाता है।


DBMS के फायदे:

Multiple Sharing: DBMS के जरिए आप किसी भी डाटा को अलग-अलग यूजर्स के साथ एक ही समय पर शेयर कर सकते हैं।


Easy Mainteneance: आज के समय में बहुत सारी कंपनियां कॉलेज और संस्थाएं DBMS का यूज कर रही हैं क्योंकि इसके जरिए डाटा को मैनेज करना बड़ा ही आसान है। इसीलिए इसका मेंटेनेंस भी काफी सरल है।


Automatic Backup: जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में कभी कभी खुद से ही कोई खराबी आ जाती है इसके चलते कई बार डाटा भी लॉस्ट हो जाता है। लेकिन DBMS में ऐसा नहीं है क्योंकि यहां पर ऑटोमेटिक बैकअप की सुविधा दी गई है जिसके जरिए यहां समय-समय पर ऑटोमेटिक बैकअप बनते रखता है जिससे कभी भी रिकवर किया जा सकता है। 


Different UIs: DBMS में अलग-अलग प्रकार के यूजर इंटरफेस जैसे ग्राफिकल यूजर इंटरफेस, एप्लीकेशन प्रोग्राम इंटरफेस इत्यादि उपलब्ध रहता है जिसे आप अपने हिसाब से प्रयोग कर सकते हैं।


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